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दो ज़िंदगी बदबू में jaanu

जीवन में होने वाले उतार चढाव को समझना।उसके साथ जीना,एक गहरी कला की तरह प्रतीत होती है। यहाँ से वहाँ तक का जीवन निर्वाह किस तरह होता है?ये आवों हवां अपना रूख किस तरह मोड़ती है? कभी स्वर्ग की कल्पना में जीते थे। काम भी उसी जगह पर था। जिस जगह को स्वर्ग की संज्ञा का नमा देते थे। दोनो के किनारे अलग-अलग एक इस पार तो,एक उस पार।
पहले वशीम अहमद जी-: जो महदिउल बनारस उत्तर प्रदेश से।
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