एकांत जगह मे, Jaanu Nagar
एकांत जगह मे
दोनो को भटकता देख दो नज़रे उनका पीछा कर रही थी । जब दोनो की नज़रे पीछे को मुड़ती तो पीछा कर रही नज़रे ओट मे जाकर छिप जाती । इस तरह से नज़रो के छुपन छुपाई का खेल चल रहा था छुपन छुपाई वाली नज़रे इतना करीब आ गयी ।लड़के ने छुपती नजर को आवाज दिया" और क्या हाल है?”
पतवार को हटाते हुए सामने से एक नीम का पेड़ हाथ मे लिए हुए ।आश्चर्य से पूछा अरे भैया आप ?
हम तो और ही कुछ सोच कार आपका पीछा कर रहे थे कि तुम दोनो लोग क्या-क्या कर रहे हो। इस तरह की आवाज को सुनकर लड़की घूमी कैमरे के फ्लैश को बन्द करते हुए ।
सवाल किया आप लोग यही रहते है ?
छुपती छुपाती नजरे अब सामने नाचने लगी छुपी नज़रे अब पहचान वाली नज़रे थी। पहचान वाली नज़रे अब हाल सुनाने लगी आप को तो पहचान ही नही पाया साथ जो लड़की थी ।इनको आज से पहले कभी नही देखा इसलिए हम आप दोनो लोगो का पीछा कर रहे थे ।क्योकी आप आगे-आगे रहते लड़की पीछे रह जाती फिर आवाज लगाती रूको यार ! वो अपने कदमो को मलवें के ऊपर रखती सभाल-सभाल कर तस्वीर को पकड़ते हुए आप के पास आ जाती एक बार तो जोर से चिल्लाया रूको-रूको ये आवाज तो
मस्जिद के छेद से सुन रहा था ।कि इस तरह के एकांत वाली जगह में एक दूशरे को यार यार कह कर पुकार लेते है लड़का लड़की
से बोलता इस जंगल मे हम दोनो के सिवां कोई नही ।लड़का बोला यदि शेर आ जाये तो लड़का हसता हुआ बोला की शेर राजा मेरे यार को खा जा मुझे छोड दे।
लड़की कुछ तम तमाते हुए कहा पागल हो क्या ? खाये,खाये तो हम दोनो को खा जाये लड़का बोला तो मै भाग जाऊगा लड़की यार ऐसा मत बोलो मेरी मम्मी तुमको छोड़ेगी नही । इस तरह मत बोलो तुम्हे इस लड़के पर भरोसा नही क्या ?
यार भरोसे के साथ तो ही घूम रही हूँ। अपने साल को सभालते हुए । दोनो लोग आगे की तरफ बढ गये जिधर पीर बाबा की मज़ार अपने ऊपर पड़े हरे कपडे को भी उडा रखा था मज़ार आज बे पर्द हो कर पीपल के पत्तो की खर खराहट को सुने जा रहे थी ।
सुनी दिवारे पुराने दावेदारो के नाम को बता रहे थे शमीमा खातून के बल्ब मे मोहर लगा कर बिजयी बनाये। अशोक माहौल को भारी मतो से बिजयी बनाये ।
बच्चो के द्वारा बनाये गये ड्राइंग मिट्टी के पर्त दर पर्त धुधले होते जा रहे है। पतली घास के पीछे छुप रहे है । इतनी हिम्मत भी नही की
पतवार को हटा कर उनको छु सके। एकांत को छोड़ते हुए उस जगह पर आ गये जहां से शहर दोडता नज़र आता है। जिसका नाम लेकर बताना थोडा मुस्किल हो । चमकीली कार बेरुखी बसे झर्राते ट्रक सड़क पर दौडते हुए निकल जाते ।बगल मे लोहे के पाईप मे एक छेद छेद से निकलता बौछार दार पानी कोक के डिब्बे मे छर्र छर्र मारे जा रहा था । इस नज़ारे के साथ एक लड़का अपने रंगीन मुवाइल के साथ रेड़ी मे बैठ कर खेले जा रहा था गेम ।लड़की अपने जेब से गुड़ की पट्टी को निकल कर लड़के को पकडा दिया ।
दूशरे हाथ से जाने का इसारा करते हुए। दौडते हुए शहर मे शामिल हो हो गयी । अगले दिन मिलने का इशारा करते हुए लड़का अभी उसी जगह पर था पट्टी को खाता अपने कदमो को अगे पीछे करता स्टैण्ड सुनेपन को जी कर आने वाली बस का इन्तजार कर रहा
था । कुछ देर बाद वो भी बस का हम राही बनकर चला गया ।
मै पीछे-पीछे ही घूमता रहा गया कि ये दोनो लोग अलग अलग जगह से आये उन्के जाने से पता चला तो साथ क्यो आये अगर अगली बार दिखेगे तो इस जगह मे साथ धूमने को पूछूगां जरूर सिर्फ सोच कर हस कर रह गया ।
