दूसरी रात जानू नागर
दूसरी रात
नीले आसमान में बिखरी स्वेत मोती अपनी स्वेत रोशनी को जमी मे गिरा रहे थे,चाँद किसी कारण वस आधा था,उस आधे शरीर पर स्वेत रोशनी का भाव था ।यह एक शहर का खाली कोना जिसमे लोगो के बसने का जोश कायम है। यह निवास स्थान अधिकत्तर चटाईयों के घरों से कुछ तो चमकीले पत्थरो की टाइलो से बने है। जिसमे आसमानी सफेद रोशनी अपनी चमक को जमाया हुआ था। बनी काली सड़के रोशनी में और काली दिख रही थी मिट्टी धूल से बनी गलियाँ नंगे पैरो को ठण्डक सा दे रही थ।
नीले आसमान में बिखरी स्वेत मोती अपनी स्वेत रोशनी को जमी मे गिरा रहे थे,चाँद किसी कारण वस आधा था,उस आधे शरीर पर स्वेत रोशनी का भाव था ।यह एक शहर का खाली कोना जिसमे लोगो के बसने का जोश कायम है। यह निवास स्थान अधिकत्तर चटाईयों के घरों से कुछ तो चमकीले पत्थरो की टाइलो से बने है। जिसमे आसमानी सफेद रोशनी अपनी चमक को जमाया हुआ था। बनी काली सड़के रोशनी में और काली दिख रही थी मिट्टी धूल से बनी गलियाँ नंगे पैरो को ठण्डक सा दे रही थ।
उस कच्ची गली मे जाते दो दोस्तो की परछाई एक दूसरे को छुती हुई जा रही थी ।दिन का काम इतना थका देता है कि उस आसमानी रोशनी मे आराम करने को जी चाहता हों चारो तरफ से खुले मैदान ,मैदान मे उगी हरी घास भी ओस से भीगंने लगी थी ।कच्ची सड़क के किनारे प्राइवेट बस अपनी हल्की रोशनी को जलाये हुए खड़ी हो गयी ।बस खडे होते ही बस मे वो झुण्ड बैठा जिन्हे अभी किसी भी तरह की परवाह नही सिर्फ खाने पीने की परवाह सारे बच्चे नवरात्रो के भण्डारे का अन्नद लेने इस उजाले वाली रात मे शहर की तरफ जाने वाले थे। बस हर गली मे परवाह ना करने वालो को चढाते हुए अगे निकलती जा रही थी जिस में चढने का सिलसिला जारी उतरने का नाम नही। बस अपनी अन्दर वाली लाइट को बुझाके बाहर वाली लाइट को जलाये हुए मिट्टी से छीटे उठाते हुए निकल गयी। उड़ती हुई मिट्टी जमी की तरफ आने लगी रोशनी साफ होते होते सड़क के किनारे एक लकड़ी से बनी मेज मे रखे स्टोप को माचिस की तीली से आग जलाने के लिए माचिस पर तीली को रगड़ रही महिला ये जान चुकी थी कि माचिस ओस से भीग चुकी है।
महिला ने आवाज दिया मनोज जरा माचिस लेकर आना यहां वाली माचिस सर्दिया गयी है। चाय के पतीले को स्टोप के ऊपर रखते हुए उधर देखा जिधर बेन्च पर बैठे वो दोनो दोस्त जिन्की परछाई रोशनी मे एक दूशरे की परछाई लिपटने का अन्नद ले रही थी । बैठो बेटा अभी बना रही हूँ ।माचिस आने के इन्तजार मे उन दोनो दोस्तो के बातो को सुने जा रही थी ।उन्की बातो को सुनकर लग रहा था कि एक इसी जगह मे रहने वाला है,दूसरा नया है इस जगह के लिए सायद वो मिलने आया है दोस्त से बात ही कुछ इस तरह की हो रही थी ।
जगह को सवालो मे रखते हुए ।
सवाल-: रात मे लोग कहा सोते है?
जवाब-: लोग अपने इन छोटे बडे कमरो मे सोते है।
सवाल-: यहां तो पूरा गाँव की तरह लगता है।दूर-दूर तक खेत ही खेत दिख रहा है ।
जवाब-: अब गाँव की तरह है ही बिजली हैं पर कुछ ब्लाँको में ।
तब तक चाय से भरे ग्लासो को सामने ला दिया जिसमे से धुआँ निकल रहा था एक दोस्त ने पूछा कि आण्टी मट्ठी नही है क्या? मगां दू क्या? मंगा दो मनोज जरा मट्ठी ले के आना मनोज दौडता हुआ मट्ठी को लेकर आ गया चाय का कुछ धुआँ कम हुआ। गिलास रखते हुए कहा दूसरा दोस्त की चलो गाँव से अच्छा है। सब कुछ मिल तो जाता है।
फिर दोनो दोस्त धूमने के लिए निकल पडे घूमते-घूमते एक इलेक्ट्रानिक की दुकान के पास जा पहुँचे दुकान वाले भाई साहब कुर्सी को छोडते हुए बैठने का इशारा किया अभी लाइट कटी थी पर आसमानी रोशनी अंधेरे को फाड़ रखा था सब कुछ साफ-साफ दिख रहा था ।रेडियो मे गाना आ रहा था "तेरा साथ है तो हमे क्या कमी है"वो दुकान वाले भाई साहब हसते हुए,हसी को थामते हुए कहा पहले के गानो लोगो के रूवों को खड़ा कर देते पर आज कल की धुन-म्यूजिक लोगो के कानो को हिला देते है।बेन्च मे बैठे दोस्तो मे किसी ने कहा कि यार राजेश पहले गानो मे रियलटी और प्रकृत की गुणों से सजे हुए होते थे ।राजेश जी ने कहां वाकाई बात मे दम है ।
दुकान कुछ सामानी खाली पर अंधेरे से भरी पडी बस उसी रेडियो के पास रोशनी थी जहा से ये गाने की आवाज आ रही थी । राजेश जी नेकहा आज कल कम नजर आते हो चन्द्रकेश गुलरी के फूल बन रहे हो नही यार टईम नही मिलता ये मेरे दोस्त है हमने इन्से कहा कि चलो राजेश जी से मिलक आते है चाहे पूछ लो,चलो याद तो किया आया करो ये आप लोगो की ही दुकान है।घन घनाती आवाज आयी रिसिवर को उठाते हुए आवाज दिया कौन?
लो चन्द्र केश आपकी वाइफ का फोन बडा किस्मत वाला है जब-जब दुकान मे आता है आपका ही फोन आता है।चन्द्र केश अपने दोस्त को वही बैठने रहने का इशारा करते हुए दुकान से बाहर निकल गये 15मिनट बाद वापस आकर बोला चलो खाना बन गया होगा खा कर आते है । जलती चिराग के सामने खाना खाया खाते-खाते तय हो गया कि हम किस जगह पर रात गुजारेगें खाना खा कर सोने को चल दिये जेसे गाँव में खाना खाने के बाद हार मे सोने के लिए अपना बिछावन को लेकर चल देते है ।
एक खाली कमरा जो सडक की उचाई से काफी ऊँचा था ऐसे ही गरी ईटो मे पैर रख कर दोनो दोस्त कमरे मे सोने लगे पर नये दोस्त को नयी जगह की वजह से नींद ना आती बाहर की सारी आवाजे उसके कानो मे पड़ रही साफ तरह से नही । कब सुबह हुआ नये दोस्त की ये आवाजे रात भर आती जाती रही समझ नही पाया की सोया या जागता रहा। बाहर से आवाज आयी जल्दी चल बेटी नही तो बस छूट जायेगी कान मे आवाज आयी बस छूट जायेगी इस तरह मन हलचल हुई की मानो सुबह ज्याद हो गयी ।कमरे से बाहर झाँका तो अभी आसमानी रोशनी फैली थी पर एक आध तारे कही-कही दूर थे चाँद उसी तरह आसमान मे तैर रहा था ।आस पास के दरवाजे खुले नही सिर्फ घरो से सोने के खर्राटो की आवाज को चीरते हुए एक महिला अपनी 7या 8 शाल की दो बच्चियो को लेकर सरपट कर बस स्टैण्ड की तरफ भाँगी जा रही एक आवाज के साथ की जमान बहुत खराब है।तुम दोनो लोग हमे बस मे बीठा कर कमरे के दरवाजो को बन्द करके आराम से सो जाना दोनो बच्चियाँ अपनी आँखो को मले जा रही सड़क पर चलती जा रही कि मम्मी तुम अकेले चली जाओ हमे नींद आ रही है चलो बेटा फिर से सो जाना आके ये कैसी सुरक्षा गार्ड थी जो खुद मे अभी कमज़ोर पर माँ के लिए तलवार की तरह रक्षक।इन दोनो की उम्र को देख कर क्या लगता है कि ये तलवार है या ढाल?
महिला ने आवाज दिया मनोज जरा माचिस लेकर आना यहां वाली माचिस सर्दिया गयी है। चाय के पतीले को स्टोप के ऊपर रखते हुए उधर देखा जिधर बेन्च पर बैठे वो दोनो दोस्त जिन्की परछाई रोशनी मे एक दूशरे की परछाई लिपटने का अन्नद ले रही थी । बैठो बेटा अभी बना रही हूँ ।माचिस आने के इन्तजार मे उन दोनो दोस्तो के बातो को सुने जा रही थी ।उन्की बातो को सुनकर लग रहा था कि एक इसी जगह मे रहने वाला है,दूसरा नया है इस जगह के लिए सायद वो मिलने आया है दोस्त से बात ही कुछ इस तरह की हो रही थी ।
जगह को सवालो मे रखते हुए ।
सवाल-: रात मे लोग कहा सोते है?
जवाब-: लोग अपने इन छोटे बडे कमरो मे सोते है।
सवाल-: यहां तो पूरा गाँव की तरह लगता है।दूर-दूर तक खेत ही खेत दिख रहा है ।
जवाब-: अब गाँव की तरह है ही बिजली हैं पर कुछ ब्लाँको में ।
तब तक चाय से भरे ग्लासो को सामने ला दिया जिसमे से धुआँ निकल रहा था एक दोस्त ने पूछा कि आण्टी मट्ठी नही है क्या? मगां दू क्या? मंगा दो मनोज जरा मट्ठी ले के आना मनोज दौडता हुआ मट्ठी को लेकर आ गया चाय का कुछ धुआँ कम हुआ। गिलास रखते हुए कहा दूसरा दोस्त की चलो गाँव से अच्छा है। सब कुछ मिल तो जाता है।
फिर दोनो दोस्त धूमने के लिए निकल पडे घूमते-घूमते एक इलेक्ट्रानिक की दुकान के पास जा पहुँचे दुकान वाले भाई साहब कुर्सी को छोडते हुए बैठने का इशारा किया अभी लाइट कटी थी पर आसमानी रोशनी अंधेरे को फाड़ रखा था सब कुछ साफ-साफ दिख रहा था ।रेडियो मे गाना आ रहा था "तेरा साथ है तो हमे क्या कमी है"वो दुकान वाले भाई साहब हसते हुए,हसी को थामते हुए कहा पहले के गानो लोगो के रूवों को खड़ा कर देते पर आज कल की धुन-म्यूजिक लोगो के कानो को हिला देते है।बेन्च मे बैठे दोस्तो मे किसी ने कहा कि यार राजेश पहले गानो मे रियलटी और प्रकृत की गुणों से सजे हुए होते थे ।राजेश जी ने कहां वाकाई बात मे दम है ।
दुकान कुछ सामानी खाली पर अंधेरे से भरी पडी बस उसी रेडियो के पास रोशनी थी जहा से ये गाने की आवाज आ रही थी । राजेश जी नेकहा आज कल कम नजर आते हो चन्द्रकेश गुलरी के फूल बन रहे हो नही यार टईम नही मिलता ये मेरे दोस्त है हमने इन्से कहा कि चलो राजेश जी से मिलक आते है चाहे पूछ लो,चलो याद तो किया आया करो ये आप लोगो की ही दुकान है।घन घनाती आवाज आयी रिसिवर को उठाते हुए आवाज दिया कौन?
लो चन्द्र केश आपकी वाइफ का फोन बडा किस्मत वाला है जब-जब दुकान मे आता है आपका ही फोन आता है।चन्द्र केश अपने दोस्त को वही बैठने रहने का इशारा करते हुए दुकान से बाहर निकल गये 15मिनट बाद वापस आकर बोला चलो खाना बन गया होगा खा कर आते है । जलती चिराग के सामने खाना खाया खाते-खाते तय हो गया कि हम किस जगह पर रात गुजारेगें खाना खा कर सोने को चल दिये जेसे गाँव में खाना खाने के बाद हार मे सोने के लिए अपना बिछावन को लेकर चल देते है ।
एक खाली कमरा जो सडक की उचाई से काफी ऊँचा था ऐसे ही गरी ईटो मे पैर रख कर दोनो दोस्त कमरे मे सोने लगे पर नये दोस्त को नयी जगह की वजह से नींद ना आती बाहर की सारी आवाजे उसके कानो मे पड़ रही साफ तरह से नही । कब सुबह हुआ नये दोस्त की ये आवाजे रात भर आती जाती रही समझ नही पाया की सोया या जागता रहा। बाहर से आवाज आयी जल्दी चल बेटी नही तो बस छूट जायेगी कान मे आवाज आयी बस छूट जायेगी इस तरह मन हलचल हुई की मानो सुबह ज्याद हो गयी ।कमरे से बाहर झाँका तो अभी आसमानी रोशनी फैली थी पर एक आध तारे कही-कही दूर थे चाँद उसी तरह आसमान मे तैर रहा था ।आस पास के दरवाजे खुले नही सिर्फ घरो से सोने के खर्राटो की आवाज को चीरते हुए एक महिला अपनी 7या 8 शाल की दो बच्चियो को लेकर सरपट कर बस स्टैण्ड की तरफ भाँगी जा रही एक आवाज के साथ की जमान बहुत खराब है।तुम दोनो लोग हमे बस मे बीठा कर कमरे के दरवाजो को बन्द करके आराम से सो जाना दोनो बच्चियाँ अपनी आँखो को मले जा रही सड़क पर चलती जा रही कि मम्मी तुम अकेले चली जाओ हमे नींद आ रही है चलो बेटा फिर से सो जाना आके ये कैसी सुरक्षा गार्ड थी जो खुद मे अभी कमज़ोर पर माँ के लिए तलवार की तरह रक्षक।इन दोनो की उम्र को देख कर क्या लगता है कि ये तलवार है या ढाल?
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