BlogGalleryContact

दूसरी रात जानू नागर

दूसरी रात
नीले आसमान में बिखरी स्वेत मोती अपनी स्वेत रोशनी को जमी मे गिरा रहे थे,चाँद किसी कारण वस आधा था,उस आधे शरीर पर स्वेत रोशनी का भाव था ।यह एक शहर का खाली कोना जिसमे लोगो के बसने का जोश कायम है। यह निवास स्थान अधिकत्तर चटाईयों के घरों से कुछ तो चमकीले पत्थरो की टाइलो से बने है। जिसमे आसमानी सफेद रोशनी अपनी चमक को जमाया हुआ था। बनी काली सड़के रोशनी में और काली दिख रही थी मिट्टी धूल से बनी गलियाँ नंगे पैरो को ठण्डक सा दे रही थ।
Read whole post  Permalink

घेवरा की पहली रात, Jaanu

घेवरा की पहली रात

दिन यों ही भागदौड़ में गुजरा कि ये लाओ वो लाओ किसी से बात करने का फुरसत नही सामानो को एकत्रित करते -करते सांझ ने अपना कदम बढा ही दिया बढते सांझ को देख सूर्य सांझ के पीछे होकर अपने आपको गहराई मे छुपा लिया गलियो मे लगे खम्भो मे लटकती बल्ब की लरियो ने सफेद रोशनी फैला दिया । माहौल कुछ बिखरा-बिखरा चटाईयो के बने मकानो से झाँकती रोशनी अंधेरे की तरफ ,कच्ची गलियां खाली ज़मीन जिसमे उगी हरी घास भी अंधेरे से भरी पड़ी ।
Read whole post  Permalink
1-2/2