घेवरा मे हुई पहली और छोटी सी मुलाकात ..(babli ray)
"अरे हमारा रंग तो अण्डे जैसा था। वो तो यहां आकर ऐसा पड़ गया। "
रोटी बनाती माया जी ने यह बात बड़े ईठलाते हुये बोली। पसीने की लड़ियां कब उनके माथे से बहकर उनकी थोडी तक आ जाती उनको पता ही नहीं चलता। अपने घर की चौखट पर बैठी वो गैस चूल्हें पर चढ़े तवे से गर्म-गर्म रोटियां उतारती गई।
रोटी बनाती माया जी ने यह बात बड़े ईठलाते हुये बोली। पसीने की लड़ियां कब उनके माथे से बहकर उनकी थोडी तक आ जाती उनको पता ही नहीं चलता। अपने घर की चौखट पर बैठी वो गैस चूल्हें पर चढ़े तवे से गर्म-गर्म रोटियां उतारती गई।
