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ये आवाज़ें नहीं चाहिएँ, Lakhmi Kohli

आज हारमोनियम लिए बिजेन्दर भाई साहब नहीं थे, ना ही कबाड़ी वाले अकंल जी नज़र आ रहे थे।

“सरजी, आप नहीं गए?” अंदर जाते हुए एक पैनी आवाज़ ने रोका।

"कहाँ?”

"आज जन्तर-मन्तर पर रैली निकाल रहे हैं। पूरी बस्ती के आदमी गए हैं। वैसे रैली तो बच्चों की है। कह रहे थे पाँच तारीख को नांगला तोड़ दी जाएगी। पहले बोला था साल भर के लिए रुकेगी बस्ती! तो सब ने फ़ैंसला किया कि बच्चों से रैली निकलवाएँगे, स्कूल ड्रेस में, ताकि नागंला माँची रुक जाए।"

इतना कह कर वो वापस अपने बर्तनों की घिसाई में जुट गईं। अब तो जैसे बस्ती में घुसने का कोई तुक नहीं था। नांगला आज खाली था। ख़ुद को साधन मान कर सब रैली में जो चले गए थे, कि शायद कोई फ़ैंसला अपने हित में हो जाए।

कुछ लोग फिर भी दिख रहे थे।
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घेवरा से लौटने के बाद, Neelofar

घर में घुसते ही कुछ नज़र नहीं आता। मैं एक तरफ़ बैठ कर धीरे-धीरे चीज़ों के दिखने का, उनका ख़ुद से दोबारा परिचय बनाने का इंतज़ार करती हूँ। कभी तो माँ अपने काम में गुमी रहती हैं, और कभी रुक कर पूछती हैं, "आज बड़ी जल्दी वापस आ गई?"

मैं टॉयलेट से होकर, पानी पीकर लेट जाती हूँ। घेवरा में गुज़ारी सुबह दिमाग में घूमती है। आज के घेवरा से किसी कलोनी बनने तक का सफ़र छोटा तो लगता है, पर मैं तय नहीं कर पाती। लगता है माँ का पिछला समय है उस जगह में। बहुत पूछूँ, तो वो कहती हैं, "मुस्तुफ़ाबाद में अपने दिन कैसे दोहराऊँ? ना लाइट, ना बाज़ार; दूर–दूर घर, कच्ची मिट्टी की ज़मीन..."

घेवरा की जगह और शकरपुर से आगे बने बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल, क्लब और सालों से चल रहा बड़ी-बड़ी जगहों का निर्माण हम से चुनौती भरा सवाल करता है, "इनमें आप कहाँ हैं?”
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छ: औरतें, Neelofar

पहली औरत

घर की चौखट के बाहर एक बाल्टी में सर्फ़ के झाग में बहुत सारे रंग-बिरंगे कपड़े भीगे हैं। दूसरी बाल्टी साफ़ पानी से भरी, उसी के बराबर में रखी है। एक औरत जल्दी-जल्दी अपने गुलाबी सूट पर 'फूल' साबुन रगड़ रही हैं, जिस से झाग तो ज़्यादा नहीं बन रहा है। साबुन कपड़े के मैल से लड़ रहा है। अब वो उस पर जल्दी-जल्दी ब्रुश मार रही हैं।

उन के शरीर की यह कसरत उन की आवाज़ को कम कर रही है। वो बोलीं, "जल्दी से काम कर लूँ, फिर प्रीति को स्कूल से ले कर आना है।“ लेकिन अभी तो सिर्फ़ साढ़े दस बजे हैं। स्कूलों की छुट्टी तो बारह-एक बजे होती है। वो बोलीं, "हाँ छुट्टी तो साढ़े बारह पर होगी, पर उस से पहले मुझे सब्ज़ी बनानी है। छोटी बेटी को नहलाना है, और ख़ुद भी नहाना है। तब तक तो इतना टाईम हो ही जाएगा।"
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